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Showing posts from December, 2008

यादो की डालियों पर अनगिनत बीते लम्हों की कालिया महकने लगी है .........

...“ एक दिन सवेरे सवेरे
सुरमई सी अंधेर की चादर ताके
एक पर्वत के तकिये से
सूरज ने
सर जो उठाया

तो देखा ….

दिल की वादी में चाहत का मौसम आया
और यादो की डालियों पर
अनगिनत बीते लम्हों की कालिया
महकने लगी है

अनकही
अनसुनी आरजू

आधी सोयी हुई

आधी जागी हुई

आँखे मलते हुए
देखती है

लहर दर लहर
मौज दर मौज
बहती हुई ज़िन्दगी
जैसे हर एक पल नयी
और फिर भी वही
हाँ वही
ज़िन्दगी

जिसके दामन में कोई मोहब्बत भी
कोई हसरत भी है

पास आना भी है

दूर जाना भी है

और ये अहसास है
वक़्त झरने सा बहता हुआ
जा रहा है ये कहता हुआ

दिल की वादी में चाहत का मौसम आया
और यादो की डालियों पर
अनगिनत बीते लम्हों की कालिया
महकने लगी है ”
....--
--

You know..?? I'll soon be an author.

Time to reveal,

You know half of me half as much as I should like but I like more than half of you more than half as much cuz you deserve. My love !

Choices:
Clap
Get bewildered
stand as if you didn't understand.

But Dilkash will always love you, sooner or later and will write about everyone no matter friend or foe cuz you were a part of life.

-- ये प्यार भी बड़ी अजीब चीज़ है ....--

ये प्यार भी बड़ी अजीब चीज़ है .जहा इकरार की पूरी उम्मीद हो वह भी दिल कहने से डरता है .और हमें तो इनकार का भी पूरा भरोसा है .

क्या यार ...ये फ़िल्मी dialogues कितने मस्त बनाते है न .पर सब kuch कितना खोखला सा लगता है .एक ऐक्टर ,एक actress परदे पर कितने इमोशनल रोमंसस portray करते है ,असलियत में सिर्फ पैसा ही ghoomta है दोनों ke दिमाग में .वो तो इस्सी थैली के चाटते बट्टे है ,पर आम आदमी ka क्या ?

अच्चा एक बात , ह्यूमन रिघ्ट्स क्विज कोम्पेतिशन में "first prize" क्रैक मारा है दोस्तों ! इस 10 दिसम्बर को हमने ह्यूमन रिघ्ट्स डे की 60 wi सालगिरह भी माने थी .

Aadat se lachaar...

Yaar mai unnecessarily jhooth kyo bolta hu.Hamesha baad me jaake mujhe confess karna padta hai. Don't know whether this is a disease or what.

B.t.w. Dipti ko abb confess karna padega.

Achcha chalo aik kahani likhta hu.

Door kisi aik jungle me aik sher aur aik gadha shikar karne ko nikle. Jab sher ne hiran ko nazdeek aate dekha to ussne gadhe ko bola- "Tu yahi ruk mai usse maar kar aata hu." Gadha wahi ruka raha, Sher dabe paav hiran ke paas pahuncha aur dubak ke uss par chalaang laga di. Bechaara Hiran pahle waar me hi dher ho gaya.
Phir kya tha, sher shikaar lekar gadhe ke paas pahuncha aur samucha Hiran usske peeth par rakh diya aur kaha- " Chal Gadhe! Isse meri gufa tak dho kar le chal .Waha iss Hiran ka mai batwaara karunga.
...
...
Gufa pahunchne par sher ne hiran ke chaar tukde kar daale.Phir gadhe ko bola -" pahla tukda mujhe milta hai, kyonki maine shikar kiya hai. Dusra tukra jungle ka raja hone ke naate mujhe milna chahiye. Teesra tukda tujhe milta hai par t…

मोमबत्ती की लौ

रात भी ऐसी ही
जब थी निशि की बेला
मानस में छाया था
भावो का ही मेला

जैसे अपने प्रेमी से
रूठी हो मानिनी
वैसे ही रूठ गयी
सदन मध्य दामिनी

गुल हो गयी प्रकाश किरण
अन्धकार हो गया
मोमबत्ती मै जला कर
लिखने में खो गया

मोमबत्ती की लौ को
पाया कुछ कांपते
देखा मै पलभर
देखा मै हाँफते

कभी पूरब कभी पश्चिम
कभी उत्तर तो कभी दक्षिण

घूमती थी लौ इसकी
इतस्ततः
पल पल छिन्न

कभी तीखी, कभी फीकी
कभी पीली, कभी उजली

कभी खिले पुष्प सी
कभी ज्यो अधखिली कलि

देख उसे भाव कुछ
मेरे मन में भर आये
दर्दो के नाम कुछ
मुख पे उतर आये

पूछा मै
ऐ मोमबत्ती ! !
दिशा क्यों बदलती हो

क्यों न स्थिर भाव से
रात भर जलती हो
होता है यदा कदा
दिशाओ का परिवर्तन
ऐ मोमबत्ती की लौ !!
करती क्यों हो नर्तन

बोली वह पूरब में एक कन्या जली है आज
बिन दहेज़ आई थी इसलिए गिरी गाज
बोली वह उत्तर में
एक मानव हुआ है नंगा
कई कोस आगे चल
आज हुआ है दंगा

उत्तर में हत्या दक्षिण में अपहरण

यदा कदा यत्र तत्र
ऐसे ही है हुए चरण
कोई विश्वास में अपने को छलता है
तोह गिरगिट सा रंग जब कोई बदलता है .

मै प्रतीक बन उनका
बस संवर जाती हु
मरते जब आदमी

मै भी मर जाती हु

कही पड़ा …

official mail id of the new CM of Maharashtra

This is the official mail id of the new CM of Maharastra, Mr Ashok Chavan:-

ashokchavanmind@rediffmail.com

Being a different CM of Maharashtra, he is poised to take several initiatives regarding the security, harmony and growth of Mumbai. If he administers well, other towns & metropolitans will follow the suite.

The new CM of Maharashtra has given us this portal to have our say/grievances/ideas reported to the administration without any hassles.

He has an unbiased team who would look into the mails having similar ideas,issues,grievances.The same typos would then be forwarded to him for final consideration.

So shouldn't we write something genuine to him.

Regards
Dilkash

Please forward this mail to people in your mailing list. Perhaps hopefully we could see some change.

Let there be peace......

Look into the status of the world now. This earth which is nothing but an insignificant speck when compared to the whole universe, yet ,its inhabitants cant live in peace. Ain't we far away from this fact that the very inheritors of this tiny speck will destroy this lone abode of life in no time.
Third world war for Water, Amongst religions, elimination of Terrorism, Superpower Nations bullying their competitors....whatever be, we, our beautiful nature and the balance in everything is definitely going to be at the loosing end. To be precise... Horrendous.

Once people have been indoctrinated into their particular brand of religious conditioning, they are ready to die for it - and even more, ready to kill.
Every war is unholy.You may be fighting in the name of religion, but fighting itself is irreligious.

The whole humanity upto now has lived in a schizophrenic way.Everyone has been cut into pieces... fragments.Your religions, your philosophies, your ideologies have not been healing p…